ओज़ोन परत क्षरण

परिचय
          धरातल से ऊपर समताप मंडल में 20-30 किमी के दायरे में ओजोन गैस की परत पाई जाती है,जो सूर्य से आने वाली घातक पराबैंगनी किरणों का अवशोषण कर उससे होने वाले दुष्प्रभावों- त्वचा कैंसर, उत्परिवर्तन, मोतियाबिंद, कमजोर इमयुनिटी आदि से बचाती है।


       पिछले कुछ वर्षों से यह परत लगातार कमजोर व पतली होती जा रही है।सर्वप्रथम ओजोन परत के पतले होने या ओजोन छिद्र की घटना का उत्पाटन 'जोसेफ फोरमैन' ने किया था। ओज़ोन की सांद्रता कम होने के पीछे मुख्यतः निम्न प्रदूषक जिम्मेदार हैं- क्लोरो फ्लोरो कार्बन(फ्रिज,एसी,सोफा फोम,एयरोसोल स्प्रे),हेलोजन्स,कार्बन टेट्रा क्लोराइड, हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन, मिथाइल ब्रोमाइड आदि।
ओजोन परत क्षरण की दृष्टि से इनमे क्लोरीन सबसे घातक है।मात्र एक क्लोरीन परमाणु 100000 ओजोन अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करने में सक्षम है। रासायनिक क्रिया का विवरण निम्न प्रकार है:- 
इस कारण CFC अत्यधिक हद तक इसके लिए जिम्मेवार है।ओजोन के स्तर को बनाये रखने के लिए ओजोन नाशक तत्वों के उपयोग को बैन करने के उद्देश्य से ही 16 सितंबर 1987 को मोंट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए।इसी की स्मृति में प्रतिवर्ष 16 सितंबर को अंतरर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस के रूप में मनाया भी जाता है।

प्रभाव-
- कैसर के बढ़ते केस।
- जलवायु परिवर्तन।
- त्वचा व आंख संबंधी बीमारियां।
- वनस्पति पर कुप्रभाव, कम उत्पादन।
- प्रवाल विरंचन व समुद्री पारितंत्र प्रदूषण।

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