भारत मे चुनाव सुधार
वर्ष 2000 से पूर्व चुनाव सुधार
- संविधान के 61वें संशोधन अधिनियम, 1989 के तहत अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
- चुनाव कार्यों में लगे अधिकारी, कर्मचारियों को चुनाव की अवधि के दौरान चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा।
- इस अवधि में ये कर्मी चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहेंगे।
- नामांकन पत्रों को लेकर प्रस्तावकों की संख्या में 10 फीसदी का इज़ाफा किया गया।
- राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 का अपमान करने पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना।
- दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना और उम्मीदवार की मौत पर चुनाव स्थगित न होना।
- इस चरण में अब तक के सबसे बड़े चुनाव सुधारों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का प्रचलन में आना शामिल है। इसका लक्ष्य चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, सटीक और पारदर्शी बनाना है जिससे प्राप्त परिणामों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जा सके।
- अतः सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बंगलुरू) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (हैदराबाद) के सहयोग से भारत के चुनाव आयोग द्वारा EVM को तैयार किया गया।
- दिसंबर 1988 में संसद द्वारा कानून में संशोधन किया गया और जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 में एक नई धारा जोड़ी गई जिसमें आयोग को EVM मशीनों के उपयोग का अधिकार दिया गया।
- प्रयोग के तौर पर EVM का पहली बार उपयोग वर्ष 1998 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली के चुनावों के दौरान किया गया था।
- वर्ष 1999 में गोवा विधानसभा चुनाव में पहली बार EVM का पूरे राज्य में प्रयोग हुआ।
वर्ष 2000 के बाद चुनाव सुधार
1. एक्ज़िट पोल पर प्रतिबंध
- जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत चुनाव आयोग ने मतदान की शुरूआत होने से लेकर मतदान समाप्त होने के आधे घंटे बाद तक एक्ज़िट पोल को प्रतिबंधित कर दिया है।
2. चुनावी खर्च पर सीलिंग
- लोकसभा सीट के लिये चुनावी खर्च की सीमा को बढ़ाकर बड़े राज्यों में 70 लाख रुपए कर दिया गया है वहीं छोटे राज्यों में यह सीमा 28 लाख रुपए तक है।
3. पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान
- सरकारी कर्मचारियों और समस्त बलों को चुनाव आयोग की सहमति के बाद पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान करने की अनुमति है।
- विदेशों में रहने वाले ऐसे भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार है जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल नहीं की है और उनका नाम किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो।
4. जागरूकता और प्रसार
- युवा मतदाओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिये प्रोत्साहित करने हेतु भारत सरकार हर वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाती है। यह सिलसिला वर्ष 2011 से शुरू हुआ।
- 20,000 रुपए से अधिक राजनीतिक चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देना।
5. नोटा
- वर्ष 2013 से नोटा व्यवस्था लागू करना एक अहम चुनाव सुधार माना जाता है। नोटा का मतलब है उपरोक्त में से कोई नहीं। यानी नन ऑफ द एबव (None of the above)।
- यह व्यवस्था मतदाता को किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में वोट नहीं देने और मतदाता की पंसद को रिकॉर्ड करने का विकल्प देती है।
- पहले जब कोई मतदाता किसी उम्मीदवार को वोट नहीं देने का फैसला करता था तो मतदाता को बूथ के पीठासीन अधिकारी को यह बताना होता था और एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना होता था। लेकिन इससे मतदाता के वोट आफ सिक्रेट बैलेट के अधिकार को नुकसान पहुँचता था।
6. मतदाता निरीक्षण पेपर ऑडिट ट्रायल(VVPAT)
- यह EVM से जुड़ी एक स्वतंत्र प्रणाली है, जो मतदाताओं को अनुमति देती है कि वे यह सत्यापित कर सकते हैं कि उनका मत उक्त उम्मीदवार को पड़ा है जिसके पक्ष में उसने मत डाला है।
- जब मत पड़ता है तो एक मुद्रित पर्ची निकलती है जिस पर उस उम्मीदवार का नाम रहता है जिसे मत दिया गया है।
7. तकनीकी का प्रयोग
निर्वाचकों के लिये कंप्यूटरीकृत डेटाबेस का निर्माण, व्यापक फोटो इलेक्टोरल सेवा, फर्जी और डुप्लीकेट इंट्री को खत्म करने के लिये डी-डुप्लीकेशन तकनीक लाना। मतदान प्रक्रिया की विडियो रिकॉर्डिंग कराना।
आयोग ने ऑनलाइन संचार यानी कोमेट नाम की एक प्रणाली विकसित की है, इससे चुनाव के दिन प्रत्येक मतदान केंद्र की निगरानी करना संभव हो गया है।
GPS का उपयोग कर मतदान केंद्रों की अब रियल टाइम निगरानी भी की जा रही है।
8. ‘सीविजिल’ एप
चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज़ करने में नागरिकों को सक्षम बनाने के लिये ‘सीविजिल’ एप लॉन्च किया है।
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