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नाबार्ड :- ग्रामीण साख का शीर्ष बैंक

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परिचय -         राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक(NABARD - National Bank for Agriculture and Rural Development) एक ऐसा बैंक है, जो ग्रामीणों को उनके विकास एवं अ‍‍ार्थिक रूप से उनकी जीवन स्तर सुधारने के लिए उनको ऋण उपलब्‍ध कराती है।           शिवरामन समिति की सिफारिशों के आधार पर 12 जुलाई 1982 को कृषि, लघु उद्योग, कुटीर एवं ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प और अन्य ग्रामीण शिल्पों के उन्नयन और विकास के लिए ऋण-प्रवाह सुविधाजनक बनाने उद्देश्य से 'नाबार्ड' की एक शीर्ष विकासात्मक बैंक के रूप में स्थापना की गई।नाबार्ड का मुख्यालय मुम्बई में है।नाबार्ड के 31 क्षेत्रीय कार्यालय व 336 जिला कार्यालय पुरे देश में वर्तमान में कार्यरत हैं।नाबार्ड की स्थापना 100 करोड़ के फंड के साथ की गई थी, जो अब बढ़कर 6700 करोड़ तक हो गया है। भूमिका व कार्य-  ★ ग्रामीण क्षेत्रों में ऋणदाता संस्थाओं(सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, वाणिज्यिक बैंक, आदि) को पुनर्वित्त उपलब्ध कराना। ★ कृषि व ग्रामीण विकास के लिए विभिन्न योजनाएं बनाना व...

मुद्रा आपूर्ति

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परिभाषा -           'किसी विशेष समय पर जनता के बीच प्रचलित धन(खर्च हेतु उपलब्ध) की कुल मात्रा ही ' मुद्रा आपूर्ति ' कहलाती है।'      देश में मुद्रा भंडार 4 रूपों में विद्यमान है:- 1- Notes and coins with the Public 2- Notes and coins with commercial bank 3- Deposits of commercial banks with RBI 4- Demand deposits with commercial banks        इनमें से केवल प्रथम( जन मुद्रा ) व चतुर्थ( बैंक मुद्रा ) को ही मुद्रा आपूर्ति में शामिल किया जाता है, क्योंकि इन्हीं का उपयोग वस्तुओं की खरीद फरोख्त व लेन देन के लिए किया जा सकता है।                 आम तौर पर मुद्रा आपूर्ति का तात्पर्य मुद्रा भंडार से लिया जाता है। जो कि गलत है, मुद्रा भंडार से आशय है किसी अर्थव्यवस्था में समस्त उपलब्ध मौद्रिक परिसंपत्तियों के कुल योग से है।वहीं मुद्रा आपूर्ति का तात्पर्य जनता के पास खर्च के लिए उपलब्ध मुद्रा से ही सम्बद्ध है। मुद्रा आपूर्ति का नियंत्रण -         मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्र...

सार्वजनिक वितरण प्रणाली

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परिचय -       सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) एक भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली है। जिसमे केंद्र व राज्य सरकारें संयुक्त रूप से मिलकर सब्सिडी वाले खाद्य और गैर खाद्य उत्पादो यथा- अनाज, गेहूं, चावल, चीनी, और मिट्टी का तेल को उचित मूल्य की दुकानों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से गरीबों को उपलब्ध कराती हैं। देश मे आज 5.5 लाख उचित मूल्य की दुकानें हैं, जो इस प्रणाली का आधार है।   केंद्र-राज्य सहयोग :-                   केंद्र सरकार(भारतीय खाद्य निगम) अनाज व अन्य उत्पादों की खरीद, भंडारण व परिवहन का कार्य करती है, वहीं राज्य सरकारें उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से अनाज वितरण का कार्य करती हैं। उद्देश्य -  - गरीब जनता को वहनीय कीमत पर खाद्यान्न आपूर्ति। - कुपोषण व भुखमरी का अंत करना। - मुनाफाखोर व कालाबाजारी करने वालों पर अंकुश। - खाद्यान्न की कीमत पर नियंत्रण। प्रणाली की कमियां - - उच्च क्वालिटी के अनाज की कालाबाजारी व निम्न क्वालिटी के अनाज की आपूर्ति। - राशन डीलरों व अधिकारियों का ...

हरित क्रांति - वरदान या अभिशाप

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परिभाषा-         हरित क्रांति का अभिप्राय उस घटना से है, जिसमें कृषि क्षेत्र में उन्नत तकनीक, उन्नत बीजों, उर्वरकों, कीटनाशकों, कृषि यंत्रों व मशीनों इत्यादि की मदद से उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई, एवं लाखों लोगों को भुखमरी से बचाया जा सका।          भारत में हरित क्रांति का पुरोधा एम एस स्वामीनाथन को कहा जाता है।इन्होंने 1966-67 में उस समय हरित क्रांति की नींव रखी, जब देश लगातार अकाल के कारण भुखमरी के गर्त में पड़ा था।इन्होंने गेंहू की अत्यंत उन्नत किस्में- कल्याण सोना, शरबती, सोनालिका - विकसित की, जिसके चलते गेंहू का उत्पादन अभूतपूर्व तरीके से बढ़ गया।इसी तरह चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा के उत्पादन में भी 2-5 गुना तक वृद्धि हुई।        1951 में भारत का कुल खाद्यान  उत्पादन महज 5 करोड़ तन था, जो हरित क्रांति की बदौलत आज बढ़कर 28.5 करोड़ टन तक पहुंच गया है।अब भारत न केवल अपनी खाद्यान्न जरूरते पूरी कर पा रहा है, बल्कि अधिशेष अनाज बेचकर विदेशी आय भी प्राप्त कर रहा है। यह हरित क्रांति की ही देन है। हरित क्रांति के ...

एम एस स्वामीनाथन - हरित क्रांति का जनक

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1925 में तमिलनाडु में जन्में एम एस स्वामीनाथन भारत के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भारत की 'हरित क्रांति का जनक' कहा जाता है ।उन्होंने 1966 में मेंक्सिको के बीजों को पंजाब के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेेहू संकर बीज विकसित किए।                       भारत लाखों गाँवों का देश है और यहाँ की अधिकांश जनता कृषि के साथ जुड़ी हुई है। इसके बावजूद अनेक वर्षों तक यहाँ कृषि से सम्बंधित जनता भी भुखमरी के कगार पर अपना जीवन बिताती रही। कई अकाल भी पड़ चुके थे। भारत के सम्बंध में यह भावना बन चुकी थी कि कृषि से जुड़े होने के बावजूद भारत के लिए भुखमरी से निजात पाना कठिन है। इसका कारण यही था कि भारत में कृषि के सदियों से चले आ रहे उपकरण और बीजों का प्रयोग होता रहा था। फसलों की उन्नति के लिए बीजों में सुधार की ओर किसी का ध्यान ही नहीं गया था।           एम. एस. स्वामीनाथन ही वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सबसे पहले गेहूँ की एक बेहतरीन किस्म को पहचाना और स्वीका...

नवीन कृषि अध्यादेश व विरोध के स्वर

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कृषि अध्यादेशो का विरोध :-  हाल ही में पंजाब सरकार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत कृषि अध्यादेशों को खारिज कर दिया है।साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में भी किसानों के विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं। 1- कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक,2020 के तहत किसान देश के किसी भी कोने में अपनी उपज की बिक्री कर सकेंगे. अगर राज्य में उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा या मंडी सुविधा नहीं है तो किसान अपनी फसलों को किसी दूसरे राज्य में ले जाकर फसलों को बेंच सकता है. साथ ही फसलों को ऑनलाइन माध्यमों से भी बेंचा जा सकेगा, और बेहतर दाम मिलेंगे. 2- मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता, 2020 के तहत किसानों की आय बढ़ाने को लेकर ध्यान दिया गया है. इसके माध्यम से सरकार बिचौलिओं को खत्म करना चाहती है. ताकि किसान को उचित मूल्य मिल सके. 3- आवश्यक वस्तु (संशोधन), 2020 के तहत अनाज, खाद्य तेल, आलू-प्याज को आनिवार्य वस्तु नहीं रह गई हैं. इनका अब भंडारण किया जाएगा. इसके तहत कृषि में विदेशी निवेश को आकर्षित करने का ...