मुद्रा आपूर्ति
परिभाषा-
'किसी विशेष समय पर जनता के बीच प्रचलित धन(खर्च हेतु उपलब्ध) की कुल मात्रा ही 'मुद्रा आपूर्ति' कहलाती है।'
देश में मुद्रा भंडार 4 रूपों में विद्यमान है:-
1- Notes and coins with the Public
2- Notes and coins with commercial bank
3- Deposits of commercial banks with RBI
4- Demand deposits with commercial banks
इनमें से केवल प्रथम(जन मुद्रा) व चतुर्थ(बैंक मुद्रा) को ही मुद्रा आपूर्ति में शामिल किया जाता है, क्योंकि इन्हीं का उपयोग वस्तुओं की खरीद फरोख्त व लेन देन के लिए किया जा सकता है।
आम तौर पर मुद्रा आपूर्ति का तात्पर्य मुद्रा भंडार से लिया जाता है। जो कि गलत है, मुद्रा भंडार से आशय है किसी अर्थव्यवस्था में समस्त उपलब्ध मौद्रिक परिसंपत्तियों के कुल योग से है।वहीं मुद्रा आपूर्ति का तात्पर्य जनता के पास खर्च के लिए उपलब्ध मुद्रा से ही सम्बद्ध है।
मुद्रा आपूर्ति का नियंत्रण-
मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण होना अत्यंत ही आवश्यक होता है, क्योंकि मुद्रा की अधिक आपूर्ति से कीमतें बढ़ने की आंशका रहती है, वहीं आपूर्ति कम होने से मंदी आने का अंदेशा रहता है। भारत मे मुद्रा आपूर्ति का नियंत्रण RBI करता है। RBI अपने कुछ विशेष साधनों से मुद्रा आपूर्ति का नियमन करता है, यथा- CRR, SLR, OMO, Repo Rate, Reverse Repo, Bank rate, आदि।
मुद्रा आपूर्ति का मापन -
मुद्रा आपूर्ति के नियमन के लिए RBI को यह मूल्यांकन करना पड़ता है कि अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति कहाँ-कहाँ व्याप्त है? अर्थव्यवस्था में मुद्रा का जो स्टॉक है, वह कैसे और कहाँ circulate हो रहा है? इस मूल्यांकन के बाद ही RBI मुद्रा आपूर्ति (money supply) को घटाने-बढ़ाने पर पॉलिसी बनाती है जिससे उसे अर्थव्यवस्था को ऑवरआल मोनिटर करने में मदद मिलती है।
अतः इस आपूर्ति के मूल्यांकन के लिए RBI ने 1977 से कुछ मौद्रिक समुच्चय स्थापित कर रखें है, जो मुद्रा की आपूर्ति समझने में मदद करते हैं, यथा-
- M0 (High Power Money) = प्रचलन में मुद्रा + RBI के पास बैंकर्स डिपॉजिट + RBI के पास अन्य डिपॉजिट। यह अर्थव्यवस्था का मौद्रिक आधार है।
- M1 (Narrow Money) = प्रचलन में मुद्रा + बैंकिंग प्रणाली के साथ डिमांड डिपॉजिट (करेंट अकाउंट, सेविंग्स अकाउंट) + RBI के पास अन्य डिपॉजिट।
- M2 = M1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा।
- M3 (Broad Money)= M1 + बैंकिंग प्रणाली के साथ टाइम डिपॉजिट।
- M4 = M3 + डाकघर बचत बैंकों के पास सभी प्रकार के डिपॉजिट।
RBI इन समुच्चयों के आंकड़े पाक्षिक आधार पर जारी करता है।
उच्च शक्ति मुद्रा(High power money):-
इसे आधार मुद्रा या आरक्षित मुद्रा भी कहते हैं, क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र की साख सृजन क्षमता इसी पर निर्भर करती है।इसके 3 प्रमुख अंश हैं, यथा-
- चलन में मुद्रा (Currency in circulation)
- RBI के पास बैंक जमाएं (Bank Deposits with RBI)
- RBI की अन्य देयताएं (Other Deposits with RBI)
मुद्रा गुणक(Money Multiplier):-
मुद्रा आपूर्ति की मात्रा आधार मुद्रा(M0) से कई गुना ज्यादा होती है।आरक्षित या आधार मुद्रा में वृद्धि से मुद्रा आपूर्ति में कितनी वृद्धि होगी, उसे 'मुद्रा गुणक' कहते हैं।मुद्रा गुणक आधार मुद्रा व मुद्रा आपूर्ति (M3) के बीच संबंध प्रदर्शित करता है।
मुद्रा गुणक = रिजर्व मनी / ब्रॉड मनी
(Money Multiplier = M0 / M3)
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